अस्तित्व का एक ही स्पंदन:- प्रेम ।।
अस्तित्व का एक ही स्पंदन:- अस्तित्व से हम अलग कहाँ हैं? हम अक्सर स्वयं को अस्तित्व से अलग मानकर जीते हैं—जैसे *मैं* यहाँ हूँ और अस्तित्व कहीं बाहर है। लेकिन…
अस्तित्व का एक ही स्पंदन:- अस्तित्व से हम अलग कहाँ हैं? हम अक्सर स्वयं को अस्तित्व से अलग मानकर जीते हैं—जैसे *मैं* यहाँ हूँ और अस्तित्व कहीं बाहर है। लेकिन…
*गुरु जी* कहते हैं, “जब दो लोग मिलते हैं, तो असल में दो लोग नहीं मिलते। दो उपस्थितियों के बीच एक संवाद घटता है।” वो अस्तित्व में collective का हिस्सा…
एक ही प्याले में समंदर उड़ेलने की यह कैसी प्यास है, हर रंग ओढ़ लूँ, हर राह चल लूँ, मन में यही एक आस है। वैज्ञानिक का संशय भी बनूँ,…