अनंत श्री ही अब तक एकमात्र ऐसे अस्तित्वगत गुरु
अनंत श्री ही अब तक एकमात्र ऐसे अस्तित्वगत गुरु हैं, जिन्हें मैंने देखा है जो किसी मनुष्य को उसके किसी एक हिस्से में नहीं, उसके पूरे अस्तित्व के साथ स्वीकार…
अनंत श्री ही अब तक एकमात्र ऐसे अस्तित्वगत गुरु हैं, जिन्हें मैंने देखा है जो किसी मनुष्य को उसके किसी एक हिस्से में नहीं, उसके पूरे अस्तित्व के साथ स्वीकार…
*_बोधि माँ_* ऐसी उपस्थिति, जिसमें करुणा तारा की तरह उतरती है, जिनके प्रकाश में अवलोकितेश्वर जैसी करुणा और अभय की दृष्टि है। उनकी उपस्थिति से एक पीठ का जन्म हुआ—…
*गीता (प्रेम का गीत*) --- **अर्जुन से अनंत तक — प्रेम से अद्वैत की यात्रा** अगर ऐसे देखें तब कुरुक्षेत्र केवल बाहर की युद्धभूमि नहीं रह जाता। वह हमारे भीतर…