जब दो लोग मिलते हैं, तो असल में दो लोग नहीं मिलते
*गुरु जी* कहते हैं, “जब दो लोग मिलते हैं, तो असल में दो लोग नहीं मिलते। दो उपस्थितियों के बीच एक संवाद घटता है।” वो अस्तित्व में collective का हिस्सा…
*गुरु जी* कहते हैं, “जब दो लोग मिलते हैं, तो असल में दो लोग नहीं मिलते। दो उपस्थितियों के बीच एक संवाद घटता है।” वो अस्तित्व में collective का हिस्सा…
**हँसी केवल जब एक भाव नहीं, being की एक अवस्था बन जाए।** तब हँसी व्यक्ति से निकलकर वातावरण को छूती है। और शायद यही कारण है कि कुछ लोगों की…
प्रेम ही रहस्यमय जीवन का आधार, विस्तार व सार है और प्रेम ही अंनत अस्तित्व में जीवन की रहस्यमय लीला है,प्रेम ही विराट जीवन के द्वैत में अद्वैत है जिसमें…