**“सात शरीर क्या होते हैं?”**
गुरु जी से एक बार किसी व्यक्ति ने पूछा— **“सात शरीर क्या होते हैं?”** गुरु जी ने बहुत सहजता से कहा— **“प्रेम महत्वपूर्ण है, बस।”** शायद पहली दृष्टि में यह…
गुरु जी से एक बार किसी व्यक्ति ने पूछा— **“सात शरीर क्या होते हैं?”** गुरु जी ने बहुत सहजता से कहा— **“प्रेम महत्वपूर्ण है, बस।”** शायद पहली दृष्टि में यह…
अस्तित्व का एक ही स्पंदन:- अस्तित्व से हम अलग कहाँ हैं? हम अक्सर स्वयं को अस्तित्व से अलग मानकर जीते हैं—जैसे *मैं* यहाँ हूँ और अस्तित्व कहीं बाहर है। लेकिन…
यह प्रश्न अद्वैत के प्रश्नों में से एक है—**“अगर मैं ही भ्रम हूँ, तो वास्तविकता का अनुभव कौन कर रहा है?”** (Reality वाले पॉडकास्ट में गुरु जी ने बहुत अच्छे…