अस्तित्व में गुरु और शिष्य के बीच का सम्बन्ध एक रहस्य है… जैसे लहरों का और किनारे का…

अस्तित्व में गुरु और शिष्य के बीच का सम्बन्ध एक रहस्य है… जैसे लहरों का और किनारे का…🌊

बड़ा अजीब रहस्य है— किनारा चल नहीं सकता, लहरें ठहर नहीं सकतीं, फिर भी हर पल दोनों एक-दूसरे से मिलने की प्रतीक्षा में होती हैं।🌊

अजीब रहस्य है लहरों और किनारे का, एक बेचैन सफ़र का, एक सहारे का (शिष्य)

🌊 किनारा चल नहीं सकता अपनी जगह से, और सब्र देखो फिर भी उसकी पुकार का इशारे का, (गुरु)

🌊 लहरें दूर समंदर की गोद से उठती हैं, बेचैन, चंचल, बेकाबू… ठहर नहीं सकतीं एक पल भी मगर, लहर को चैन कहाँ है ठहरने के सहारे का।

🌊 मिलन उनका बस एक लम्हे की कहानी है, फिर लंबा सिलसिला है अनंत प्रतीक्षा का..

🌊 किनारा खामोश खड़ा है अपनी जगह, जैसे सूफ़ी हो इंतज़ार में दीदार के तारे का।

🌊 लहरें आती हैं, उसके क़दमों में बिखर जाती हैं, सुकून पाती है और फिर लौट जाती हैं, फिर से आने को… प्रेम का धैर्य—देखो… न किनारा शिकायत करता है, न लहरें आना छोड़ती हैं। हर बार बिछड़ने के बाद भी लहरें उसी की ओर लौटती हैं। और किनारा हर बार उतनी ही शांति से उन्हें स्वीकार कर लेता है।

🌊 शायद प्रेम का रहस्य भी यही है— जहाँ कोई किसी को बाँध नहीं सकता, फिर भी दोनों (गुरु और शिष्य)… एक अदृश्य समर्पण, श्रद्धा और प्रेम के गहन आकर्षण में बंधे रहते हैं।

🌊 कभी-कभी लगता है लहरें – प्रेम की बेचैनी हैं और किनारा – प्रेम का धैर्य। लहरे बिना ठहरे जी नहीं सकती, किनारा बिना प्रतीक्षा के।

🌊 और इस तरह अनादि काल से अस्तित्व समंदर के हृदय में प्रेम की यह मौन कथा लहरों और किनारे के बीच चलती चली आ रही है। ✨

Anant Sangha…

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