अस्तित्व का एक ही स्पंदन
अस्तित्व का एक ही स्पंदन:- अस्तित्व से हम अलग कहाँ हैं? हम अक्सर स्वयं को अस्तित्व से अलग मानकर जीते हैं—जैसे *मैं* यहाँ हूँ और अस्तित्व कहीं बाहर है। लेकिन…
अस्तित्व का एक ही स्पंदन:- अस्तित्व से हम अलग कहाँ हैं? हम अक्सर स्वयं को अस्तित्व से अलग मानकर जीते हैं—जैसे *मैं* यहाँ हूँ और अस्तित्व कहीं बाहर है। लेकिन…
यह प्रश्न अद्वैत के प्रश्नों में से एक है—**“अगर मैं ही भ्रम हूँ, तो वास्तविकता का अनुभव कौन कर रहा है?”** (Reality वाले पॉडकास्ट में गुरु जी ने बहुत अच्छे…
**हँसी केवल जब एक भाव नहीं, being की एक अवस्था बन जाए।** तब हँसी व्यक्ति से निकलकर वातावरण को छूती है। और शायद यही कारण है कि कुछ लोगों की…