प्रेम है अभय होकर सहज होने की यात्रा- Inner Reflection of Anant Sangha…
प्रेम है अभय होकर सहज होने की यात्रा, प्रेम है शिवत्व में ठहरकर शून्यता में पूर्णता के साथ प्रवाह में होने की अनंत यात्रा ,प्रेम व ज्ञान दो नहीं हैं…
प्रेम है अभय होकर सहज होने की यात्रा, प्रेम है शिवत्व में ठहरकर शून्यता में पूर्णता के साथ प्रवाह में होने की अनंत यात्रा ,प्रेम व ज्ञान दो नहीं हैं…
प्रेम भी एक अचार की तरह पकता है गुरु जी कहते हैं—प्रेम को समझना और उसका खिलना, अचार के पकने जैसा है। अचार को बनाया तो एक दिन में जा…
🌼 रूह की सरज़मीं का स्वभाव आनंद है, बाक़ी सब आते-जाते मौसम हैं। 🌼 *कहानी कहती है* — हरे-भरे घास के मैदान में, साँझ की सुनहरी धूप तले, दो गाएँ…