उत्सव

उत्सव- अनंत श्री

उत्सव का अर्थ नाचना और गाना ही नहीं है. उत्सव एक बहुत ही गहरी घटना है जिसमें नृत्य और गान भी हो सकता है और परिपूर्ण मौन और स्थिरता भी. और सबसे रहस्यमय बात तो यह है कि यह सब एक साथ हो सकता है. प्रायः होता भी है.

उत्सव में होने के लिए जिनके लिए नाचना और गाना जरुरी लगता है वो उत्सव को बिलकुल नहीं जानते. मैं नाचने और गाने को गलत नहीं कह रहा हूँ, बस इतना जान लो कि वो अनिवार्यता नहीं है. उत्सव मौन में भी होता है.

पूरी प्रकृति एक गहरे महोत्सव में है. वो मौन भी है और मुखर भी, स्थिर भी और गतिमान भी. प्रकृति में यहाँ गाती, गुनगुनाती और नाचती हुई नदी जितनी उत्सवमय है उतने ही मौन में डूबे पर्वत शिखर भी.

उत्सव भी आजकल एक नयी बीमारी की तरह हो गया है और अक्सर अपनी जड़ता और विक्षिप्तता को ढकने के काम आता है.

कृष्ण और मीरा जितने उत्सवपूर्ण हैं उतने ही बुद्ध और महावीर भी. उत्सव एक आंतरिक गुणवत्ता है, कोई बाहरी प्रदर्शन नहीं.

This Post Has 6 Comments

  1. Piku samanta

    उत्सव का सही अर्थ तो आपसे ही मिला है , जब अंतर तोम् मे peace,love,happiness,harmony का फूल खिल उठती है तभी उत्सव घट जाती है। तब अभीव्यक्ति कभी गीत मे, नित्य मे,मौन
    कि अवस्था मे दिखाई दे जाती है। 🌷🌷🌷🌺🙏🏻

  2. Meera Gopalan

    🙏

  3. परमवीर

    अहोभाव प्रभु ❤️🙏🏻

  4. Puranjay Anant anaadi

    💚🩵💛💙

  5. अनीता

    ❤🙏❤

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