मंदिर एक महत्वपूर्ण घटना है. भारत में शायद ही कोई जगह ऐसी हो जहाँ मंदिर न हो. प्रारंभ में भारत में मंदिरों का निर्माण ध्यान के लिए ही किया गया था. ध्यान के अलावा मंदिर के पीछे एक गहरी सोच थी कि व्यक्ति को सामान्य जीवन से ऊपर भगवत्ता के जीवन का स्मरण दिलाया जाये.
इस स्मरण के लिए मंदिर अलार्म घड़ी की तरह हैं. उसमें बजते घंटे व्यक्ति को स्मरण दिलाते हैं कि जागना है परमात्मा के आयाम में. मंदिर की आकृति स्मरण दिलाती है कि जीवन का यह भी एक गहरा आयाम है अंतर्यात्रा का. जब अपने सामान्य जीवन से व्यक्ति ऊबता है तो उसे मंदिर की याद आती है. वहां जाकर वो जीवन के एक गहरे आयाम का स्मरण कर पाता है और उसे ख्याल आता है कि इस बेहोशी में चलते, जीवन में होश का दिया जलाना है.
मंदिर का उपयोग पूजा-पाठ व कर्मकांड इत्यादि के लिए नहीं है, उसका उपयोग तो तुम्हें परमात्मा का स्मरण दिलाने के लिए है. व्यक्ति एक प्रकार की नींद में है और मंदिर नींद से बाहर आने का आह्वान हैं. मंदिर सुन्दर हैं लेकिन उनका उपयोग वहीं तक है जब तक व्यक्ति जाग न जाये. जैसे ही तुम जागते हो अलार्म का काम पूरा हुआ. तब तुम अलार्म को बंद करके अपने जीवन की यात्रा में आगे चलते हो.
जो अभी नहीं जागा उसके लिए अलार्म की उपयोगिता है. ध्यान इत्यादि की भी तभी तक उपयोगिता है. मंदिर की उपस्थिति इसीलिए महत्वपूर्ण है कि वो व्यक्ति को अंतर्यात्रा का स्मरण दिलाती रहे.
नमन गुरुदेव, दिव्य संदेश.
नमन गुरुदेव, बहुत सुन्दर देशना.
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