जिसका ह्रदय सुंदर है उसे हर तरफ सुंदरता ही दिखाई देती है। जो असुंदर दूसरों की निगाह में होता है, वह उसके लिए संभावित सुंदरता होती है। एक ध्यानी की यही पहचान है कि वह जगत को और सुंदर बनाने की प्रक्रिया में लगा है भीतर से भी और बाहर से भी।
असुंदर कुछ है भी नहीं। अब तुम कहोगे कि जगत में इतनी कुरूपता है, विचार के तल पे, भाव के तल पे और क्रिया के तल पे तो उसका क्या ?
तुम निंदा के भाव से उसे मत देखो, आक्रामक मत हो, धैर्य रखो और संवेदनशील बनो। जहाँ भी असुंदरता है, वहाँ संवेदनशील प्रेम ने स्पर्श नहीं किया होगा, इस संस्पर्श को वहां पहुँचने दो। धीरे-धीरे सब रूपांतरित होगा, और जगत अभूतपूर्व सुंदरता से भरने लगेगा। ध्यानी होने का यही अर्थ है कि अपने पीछे सुंदरता की सुवास छोड़ते चलो, और जगत को कुछ और सुंदर बनाओ, जैसा यह तुम्हे मिला था उससे अधिक सुंदर इसे बनाओ।
बेशकीमती अद्भुत सुन्दर देशना!
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