गुरु स्वयं तुम्हारे पास आता है

गुरु स्वयं तुम्हारे पास आता है- अनंत श्री

समस्या कभी दुष्ट व चालाक गुरुओं से नहीं होती है, समस्या होती है अज्ञानी गुरुओं से. अगर कोई दुष्ट व्यक्ति है, चालाकी से भरा है और वो गुरु की तरह से प्रतिष्ठित हो गया है तो उसे तुम देर-सबेर जान ही लोगे, पहचान ही लोगे और तब उससे दूर हो जाओगे. लेकिन उस व्यक्ति का क्या करोगे जो अभी स्वयं अज्ञान से भरा है और अपनी अज्ञानतावश ही उसने अपने को गुरु मान लिया है.

एक साधक को यहीं पर सबसे अधिक सावधान रहना है. अपनी सावधानी के लिए उसे बस इतना ही करना होता है – अपनी प्यास को प्रामाणिक बनाना. और जब तुम्हारी प्यास प्रामाणिक हो जाती है, स्वयं को जानने की तुम्हारी अभीप्सा, तुम्हारी एक-एक कोशिका में उतर जाती है, तब गुरु स्वयं तुम्हारे पास आता है. उसे खोजना नहीं पड़ता. तैयारी शिष्य की है.

जब शिष्य तैयार हो जाता है, गुरु प्रकट हो जाता है. अपनी तैयारी के बिना, अपनी प्यास को टटोले बिना अगर तुम गुरु को ढूंढने निकलोगे तो तुम पाखंडी और अज्ञानी गुरुओं के पास जा पहुंचोगे. उन्हें दोष मत दो, अपनी ओर ध्यान दो. तुम जैसे हो वैसे ही लोग और परिस्थितियां अपनी ओर आकर्षित कर लेते हो.

This Post Has 7 Comments

  1. परमवीर

    सजगता से गुरु का आविर्भाव एक अस्तित्वगत् घटना…. नमन सद्गुरु ❤️🌹🙏🏻🙏🏻

  2. Rajan

    Sundar deshna Prabhu.🙏🧡💛

  3. Sunita singh

    🙏🙏❤️❤️❤️

  4. अनीता

    🌻🙏🌻

  5. Sunanda

    🍀🧡🍀🧡🍀🧡🍀

  6. Anant Santosh(Rishi Prakash)

    सही और ग़ैर सही गुरु की पहचान तो साथ चलने पर ही होती है । कभी कभी साधक को पहचानने में देर भी हो सकती है फिर वह अपने आप को ठगा हुआ पाता है.। 🙏🌹🙏

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