Inner Reflection of Anant sangha’s friend -Guru Phenomena
Inner Reflection of Anant sangha’s friend -Guru Phenomena
गुरु तो जीवन में अक्सर मिल जाते हैं, लेकिन कुछ अस्तित्वगत गुरु ऐसे होते हैं जिनके आने का एहसास भी आपको तुरंत नहीं होता। पता ही नहीं चलता कि कब केवल उनके पास बैठने, उन्हें सुनने और उन्हें देखने भर से आपके स्वभाव में परिवर्तन शुरू हो गया। और यह परिवर्तन इतना सहज होता है कि आपको स्वयं भी इसका आभास नहीं होता, लेकिन आपके आसपास के लोग कहने लगते हैं— “तुममें कुछ तो बदल गया है।”
हम आध्यात्मिक मार्ग पर अपनी पूरी शक्ति लगा देते हैं। कभी तंत्र, कभी मंत्र, कभी अलग-अलग विद्याएँ, पूजा-पाठ और कर्मकांड सीखते रहते हैं, इस आशा में कि जीवन में कोई बड़ा परिवर्तन होगा। लेकिन अक्सर भीतर वही भटकाव बना रहता है। फिर एक समय ऐसा आता है जब शायद हमारी तैयारी पूर्ण हो जाती है, और तभी अस्तित्व स्वयं हमें ऐसे गुरु से मिलाता है। मेरे लिए वे अनंतश्री हैं।
उनका मिलना किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। क्योंकि यदि एक सच्चे गुरु मिल जाएँ, तो फिर जीवन में और कुछ बदले या न बदले, आपको एक ऐसा संबंध मिल जाता है जो हर क्षण आपको परमशक्ति से जोड़े रखता है। जैसे एक अदृश्य वाई-फाई कनेक्शन, जो कभी टूटता नहीं।
और यदि कभी जीवन की परिस्थितियों में आप अपने मार्ग से थोड़ा भटक भी जाएँ, तो ऐसे गुरु आपको अपराधबोध से नहीं भरते। वे केवल प्रेम देते हैं, आपका हाथ थामे रहते हैं और धैर्यपूर्वक आपको आगे बढ़ाते हैं। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, वे आपका साथ नहीं छोड़ते। मेरे लिए ऐसे ही गुरु हैं अनंतश्री।
मैं तो यही चाहूँगी कि जो लोग वास्तव में अनंतश्री के लिए बने हैं, वे उनकी केवल एक वीडियो या एक वाक्य सुनकर ही भीतर से पहचान जाएँगे कि यही मेरे गुरु हैं। और मुझे विश्वास है कि ऐसा अवश्य होगा। मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मुझे मेरे गुरु मिले।
यदि आपने अभी तक अनंतश्री को नहीं सुना है, तो एक बार अवश्य सुनिए। उनकी सबसे सुंदर बात यही है कि वे गहन से गहन आध्यात्मिक सत्य को भी इतनी सरलता से समझाते हैं कि कुछ भी जटिल नहीं लगता। ऐसा अनुभव होता है मानो कोई अपना मित्र प्रेम से जीवन के रहस्य समझा रहा हो।