हम अपनी ज़िंदगी को रचने और सँवारने वाले कलाकार स्वयं हैं

हम अपनी ज़िंदगी को रचने और सँवारने वाले कलाकार स्वयं हैं- अनंत श्री

हम अपनी ज़िंदगी को रचने और सँवारने वाले कलाकार हैं। कभी ज़िंदगी का कैनवास हमारे सामने आ जाता है और उसके साथ ही हाथों में रंग और ब्रश भी कुदरत पकड़ा देती है। अब यह हमारी जिम्मेदारी होती है कि उन रंगों और ब्रश को रखकर भूल जायें और कैनवास को धूल खाने दें या फिर हम उनका उपयोग करके उसे एक शानदार कलाकृति में बदल डालें।

कभी ज़िंदगी हमारे सामने चट्टान की तरह आ खड़ी होती है और तब कुदरत हमारे हाथों में छेनी और हथौड़ा थमा देती है। हम चाहें तो चट्टान के सामने आ जाने से परेशान होते रहें या फिर उसे तराश कर एक सुंदर मूर्ति में बदल दें या फिर उसे रास्ते को सरल बनाती सीढ़ियों में बदल दें।

कभी ज़िंदगी हमारे सामने कागज़ की तरह फैल जाती है और तब कुदरत हमारे हाथों में कलम रख देती है। अब यह हमारा काम होता है कि उस कागज़ को शिकायतों, गालियों और अनर्गल बातों से भर दें या फिर प्रार्थनाओं, अनुग्रह और अर्थपूर्ण बातों से भरें।

कभी ज़िंदगी एक रास्ता बनकर हमारे सामने आ जाती है और तब यह हम पर निर्भर करता है कि उस रास्ते का उपयोग करके हम अपने से दूर चले जायेंगे या अपने निकट आ जायेंगे।

सजगता यही है कि जब जैसी ज़िंदगी हो हमारे सामने, उसे पूरे स्वीकार और विवेक से जी लें। यहाँ कुछ भी दुबारा नहीं होता, कोई भी क्षण दुबारा लौटकर नहीं आता। अतः प्रत्येक क्षण को पूरी सजगता से जियें।

This Post Has 8 Comments

  1. अनीता

    🙏🙏🙏

  2. Meera Gopalan

    🙏

  3. Sandeep

    Mast!

  4. Abhishek

    🧡🤍Love and gratitude.🤍🧡

  5. Rajan

    💙 gratitude.💙

  6. Sapna Gadlng

    🙏🙏💐💐

  7. Piku

    Sundar🌹💐🙏

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