सद्गुरु का होना

सद्गुरु का होना- अनंत श्री

एक सद्गुरु का होना शून्य है. वो है फिर भी नहीं है. यही उसके होने का रहस्य है. वह तुम्हें बदलने का कोई प्रयास नहीं करता. फिर भी यदि तुम उसके पास होकर अपने हृदय के द्वार खोल सको तो तुम बदलने लगते हो.

सद्गुरु तुम्हारे भीतर के गुरु को प्रकट कर देता है और समस्त बैसाखियों से मुक्त कर तुम्हें अपने पैरों पे चलना सिखा देता है. सद्गुरु कोई समाज सुधारक नहीं है. वह किसी को सुधारना नहीं चाहता. वह तो समस्त चाह और प्रयास से परे हो गया है. और इसीलिए उसकी शून्य उपस्थिति में प्रत्येक चाह और प्रयास अपनी शुद्धता को उपलब्ध होकर शून्य के परम आकाश में उठने लगते हैं.

सद्गुरु ऐसा रहस्य है कि यदि तुम बहुत संवेदनशील न हो तो उसके होने का एहसास भी तुम्हें नहीं होता. वह अनुपस्थित जैसा होता है तुम्हारे बीच. वह तो विचरण करता हुआ रहस्य ही है जो तुम्हारे सारे अनुमानों से परे है.

जब हम अनुमान लगाना बंद कर देते हैं और अपनी संवेदनशीलता को विकसित करते हैं तो यह रहस्य हमारे प्राणों में उतरने लगता है.

सद्गुरु आकाश जैसा है जिसमें सारे विपरीत तत्व और विरोधाभास नृत्य कर रहे होते हैं. जो विपरीतता और विरोधाभासों के नृत्य से लयबद्ध हो पाता है, वही जीवन की धन्यता की यात्रा पर निकल पाता है.

सद्गुरु इस धन्यता की यात्रा में जीवन की तरह साथ-साथ होता है. और यात्रा की समाप्ति पर परम जीवन की तरह हम पर बरस जाता है और बरसकर हमारे ही भीतर तिरोहित हो जाता है.

This Post Has 5 Comments

  1. Puranjay Anant anaadi

    Gratitude 🌹🪷🙏

  2. अनीता

    ❤🙏❤

  3. Rishi Prakash (Anant Santosh)

    🌹🙏🌹❤️🌈💥

  4. Sapna Gadlng

    🙏🙏🌹🌹

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