शब्दों में नहीं होते

This Post Has 5 Comments

  1. अनीता

    🙏🙏🙏

  2. Ravi

    प्रणाम मां! बहुत सुन्दर!नमन!

    अर्थ, सार या प्राण गीता के शब्दों में नहीं है बल्कि शब्दों के श्रोत श्री कृष्ण / गुरु/शिव /चैतन्य में ही है जो कि अस्तित्व /परमात्मा ही हैं और सनातन जीवन का आधार भी हैं। 🙏💛

  3. Puranjay Anant anaadi

    🙏🏻🌹💐💛

  4. Rishi Prakash (Anant Santosh)

    गहन अर्थों को समेटती हुई सुंदर कविता🌹🙏🌈🌻♥️

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