शब्दों में नहीं होते You Might Also Like न कोई खोज थी November 21, 2024 रास्ते ही नहीं होते महत्वपूर्ण September 19, 2024 कितना दुश्वार है December 12, 2024 This Post Has 5 Comments अनीता August 22, 2024 Reply 🙏🙏🙏 Ravi August 22, 2024 Reply प्रणाम मां! बहुत सुन्दर!नमन! अर्थ, सार या प्राण गीता के शब्दों में नहीं है बल्कि शब्दों के श्रोत श्री कृष्ण / गुरु/शिव /चैतन्य में ही है जो कि अस्तित्व /परमात्मा ही हैं और सनातन जीवन का आधार भी हैं। 🙏💛 Puranjay Anant anaadi August 23, 2024 Reply 🙏🏻🌹💐💛 Deepika Deshpande August 23, 2024 Reply 🙏🙏🌹 Rishi Prakash (Anant Santosh) August 27, 2024 Reply गहन अर्थों को समेटती हुई सुंदर कविता🌹🙏🌈🌻♥️ Leave a Reply Cancel replyCommentEnter your name or username to comment Enter your email address to comment Enter your website URL (optional) Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.
Ravi August 22, 2024 Reply प्रणाम मां! बहुत सुन्दर!नमन! अर्थ, सार या प्राण गीता के शब्दों में नहीं है बल्कि शब्दों के श्रोत श्री कृष्ण / गुरु/शिव /चैतन्य में ही है जो कि अस्तित्व /परमात्मा ही हैं और सनातन जीवन का आधार भी हैं। 🙏💛
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प्रणाम मां! बहुत सुन्दर!नमन!
अर्थ, सार या प्राण गीता के शब्दों में नहीं है बल्कि शब्दों के श्रोत श्री कृष्ण / गुरु/शिव /चैतन्य में ही है जो कि अस्तित्व /परमात्मा ही हैं और सनातन जीवन का आधार भी हैं। 🙏💛
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गहन अर्थों को समेटती हुई सुंदर कविता🌹🙏🌈🌻♥️