…परमात्मा तुम्हारी आत्यंतिक सम्भावना है, वह अनंत की पुकार है, वह अज्ञात का आमंत्रण है, वह परम जीवन का महोत्सव है, वह जीवन का रस व रहस्य है.
परमात्मा कोई सृष्टा या नियंता नहीं है, वह तो सृजन की अनवरत प्रक्रिया व जीवन का शाश्वत नियम है. परमात्मा का अर्थ यह नहीं है कि जिसने जगत को बनाया, परमात्मा का अर्थ है – जीवन की सतत गतिमान व सतत प्रवहमान अवस्था, जिसका न कोई प्रारंभ है और न कोई अंत है…
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Pramatama ka adhbut varnan…👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻Pranaam Anant Sri 1🙏🏼🙏🏼🌹🌹🙏🏼🙏🏼
अहोभव अनंत श्री!
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Naman Prabhu
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