आरती का प्रतीक

आरती का प्रतीक- Anant Sri

प्रायः हिन्दू अपने धार्मिक अनुष्ठानों में आरती का आयोजन करते हैं. आरती भी हिन्दुओं द्वारा आत्म रूपांतरण के सूत्र कहने का सुन्दर तरीका है. लोग प्रायः परिधि में ही अटके रह जाते हैं और परिधि के भीतर समाये केंद्र के रहस्य से चूक जाते हैं. ऐसा अनेक प्रतीकों के साथ हुआ है और आरती भी उनमें से एक है.

आरती में प्रायः कपूर का प्रयोग किया जाता है. कपूर अपने आप में अद्भुत है, वह जलता है तो पूरी तरह समाप्त हो जाता है. अपने पीछे बस एक दिव्य सुगंध छोड़ जाता है. यह इशारा है अपने मन को जलाकर अमन में प्रवेश कर जाने का.

मन को अपनी चेतना की अग्नि में कपूर की तरह रख देना है और तब मन समाप्त हो जाता है. चेतना की अग्नि भी विलीन होकर शुद्ध साक्षित्व में बदल जाती है. और मन के समाप्त होने की सुगंध से आसपास का जगत भर जाता है. यह सुगंध आसपास के जगत को सौन्दर्य, शुभता और सृजनात्मकता से समृद्ध कर देती है.

आरती की इस प्रक्रिया में ध्यान की एक विधि भी छुपी है – स्वयं को कपूर की तरह अनुभव करो और परमात्मा की अदृश्य अग्नि में धीरे-धीरे विलीन होता हुआ अनुभव करो…तुम अभी बस मन ही हो. और मन के सारे उलझाव ही तुम्हें उलझाये हैं…तुम्हारे शरीर और मन गहरे ढंग से अंतर्संबंधित हैं. अतः जब तुम स्वयं के शरीर को कपूर की तरह विलीन होने का भाव करते हो तो मन भी विलीन हो जाता है.

भगवान शिव ने विज्ञान भैरव तंत्र में इस तरह की एक ध्यान विधि का वर्णन किया है. आरती में इसी ध्यान विधि को दर्शाया गया है.

This Post Has 8 Comments

  1. अनीता

    ❤🙏❤

  2. परमवीर

    नमन सद्गुरु आहोभाव🌹💓💓💓💓😊😊😊😊🙏🏻🙏🏻🙏🏻

  3. Rishi Prakash (Anant Santosh)

    प्रणाम तथागत सद्गुरुजी 🌹🙏🌻♥️

  4. Ravi

    Beautiful and wonderful 🔱🙏😌♥️🌻

  5. Ravi

    Beautiful and wonderful 🙏😌♥️🌻

  6. Ravi

    Beautiful 🙏😌♥️🌻

  7. Sapna Gadlng

    🙏🙏💐💐

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