शक्तिपात

शक्तिपात

शक्तिपात शब्द भ्रामक है क्योंकि कोई भी सद्गुरु शक्तिपात नहीं करता, वह तो तुम्हें बस प्रेमपूर्वक शाश्वत शक्ति के प्रति जागृत कर देता है. शक्ति तो हमेशा है, उसे प्रकट नहीं करना होता है.

तुम्हारी विचारशून्य अवस्था में जो शेष रहता है वो है शक्ति का शाश्वत नृत्य. और यही है शाश्वत जीवन.

शक्तिपात के नाम से जो चलता है वो तो मात्र मानसिक खेल है. एक सद्गुरु तुम्हें प्रत्येक प्रकार के मानसिक खेल से मुक्त करता है.

शक्ति की आकांक्षा ही तुम्हें शक्ति से दूर करती है. सद्गुरु की उपस्थिति तुम्हें इस आकांक्षा से मुक्त करती है, और तब शक्ति के सिवा कुछ और है ही नहीं.

This Post Has 8 Comments

  1. Puranjay Anant anaadi

    Ahobhav ❤️💐🌹

  2. Puranjay Anant anaadi

    Ahobhav 💐❤️💐🌹

  3. Sneha dalvi

    🙇‍♀️🙏

    1. Sapna Gadlng

      🙏🙏❤️

  4. अनीता

    ❤🙏❤

  5. Satish Dongre

    Sadar naman

  6. Sapna Gadlng

    🙏🙏🌹🌹

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