मन की अकल्पनीय संभावनाएं हैं

मन की अकल्पनीय संभावनाएं हैं – अनंत श्री

मन की अकल्पनीय संभावनाएं हैं। तुम्हारा मन तुम्हारे लिये चमत्कार कर सकता है। मन ही स्वर्ग रच देता है और मन ही नरक रच लेता है। मन के हारते ही जीवन हारता हुआ लगता है और मन के जीतते ही जीवन जीतता हुआ लगता है।

मन यदि बस स्मृतियों का संग्रह मात्र है, और वो स्मृतियों की ही जुगाली करता  रहता है, तो आने वाला भविष्य भी अतीत की पुनरावृत्ति मात्र रह जाता है। लेकिन यदि मन को सचेतन दृष्टा में बदल दिया जाये, तो मन एक रूपांतरण से गुजर जाता है।

मन एक अत्यंत संवेदनशील माध्यम है। कुछ लोग मन से लड़ने लगते हैं, मन को मिटाने के प्रयास करने लगते हैं और मन को विलीन करने की चेष्टाएँ करने लगते हैं, लेकिन वो यह भूल जाते हैं कि यह सब भी मन ही कर रहा होता है। मन चेतना की ही अभिव्यक्ति है। मन को मिटाना नहीं है, मन की दिशा बदल देनी है।

बाहर की ओर जाता हुआ मन संसार रचता है और संसार के अनुभव में उतरता है। भीतर की ओर जाता हुआ मन चेतना की ओर लौटता है और अपने स्रोत के अनुभव में उतरता है।

मन की असीम संभावनाओं का उपयोग करने के लिये आवश्यक है कि मन से संबंधित सारी धारणाओं और पूर्वाग्रहों को छोड़ दिया जाये और मन की हर हलचल को चेतना के प्रकाश से भरने दिया जाये।

This Post Has 3 Comments

  1. अनीता

    पढ़ते हुए एक समझ भी आयी कि मेरा मन भी अतीत की स्मृति मे कभी क्षणिक चला जाता था।और अब इस बात पर दृष्टी पड़ते ही कुछ बदलने की शुरुआत लग रही है।
    आभार 1❤🙏❤

  2. Sapna Gadlng

    🙏🙏

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