Inner Reflection of Living Untethered – निर्बाधित जीना – Anant Sri Podcast- Anant Sangh…

जीवन को बहने दो, कायनात अपना पता हमसे होकर खोज लेगी।

🌼 शुक्रवार के सहज लम्हों में, इस बार बहते हुए पॉडकास्ट को सुनते हुए, जहाँ अनंत श्री जी जीवन को किसी सिद्धांत की तरह नहीं, बल्कि एक सहज प्रवाह की तरह हमारे सामने उकेर रहे थे, वही मन अनायास ही किसी शांत चिंतन में उतर गया। फिर एक प्रश्न देर तक भीतर गूँजता रहा — आख़िर ज़िंदगी तू है क्या?

🌼 रस्म-ए-तकल्लुफ़ छोड़कर, बैठे हैं तेरे रू-ब-रू, कुछ तो बता अपनी रज़ा, कुछ बोल दे ऐ ज़रा ज़िंदगी।

🌼 बस इतनी सी है ये इल्तिजा, इस आख़िरी से मोड़ पर, रक्खा है तेरे काँधे पर सर, कुछ बोल दे ज़रा ऐ ज़िंदगी।

🌼 तारों भरी इक रात हो, काँपता हुआ जज़्बात हो, कोरा सा इक काग़ज़ लिए, मेरी कलम हो, तेरे अल्फ़ाज़ हो। तू थोड़ी अपनी आग लिख, मैं थोड़ी अपनी राख लिखूँ, तू अपनी खामोशियाँ रख, मैं थोड़े अपने ख़्वाब लिखूँ। चल…

🌼 आज बिना किसी मंज़िल के दोनों साथ चलते हैं, ज़िंदगी, तू मेरे भीतर यूं उतर, मैं तेरे भीतर बिखर जाऊं, ऐ ज़िंदगी। वो जो हर दिन हमसे होकर गुज़रती है… पर क्या हम उससे कभी सचमुच मिलते हैं? क्या हम कभी ठहरकर उसे देखते हैं, या बस उसके साथ भागते चले जाते हैं? कोई उपलब्धि नहीं, कोई मंज़िल भी नहीं। कभी-कभी लगता है, जीवन को समझना नहीं, उससे रूबरू होना ज़रूरी है। और रूबरू होने के लिए थोड़ा रुकना पड़ता है… इतना कि भीतर की भागदौड़ शांत हो जाए, इतना कि हम सुन सकें— वह हर रोज़ हमें पुकार भी रही है। शायद जीवन का सबसे सुंदर रहस्य यही है कि वह उत्तर बनने से पहले एक आमंत्रण बनकर आता है। इन अल्फ़ाज़ों को सजाने के बाद मैंने अपनी क़लम रख दी। सुबह जब नींद से उठकर समय देखा, तो घड़ी में 4:00 बजे थे। जब भी किसी दिन मेरी आँख थोड़ी पहले खुल जाती है, वह दिन मेरे लिए किसी रहमत से कम नहीं होता। भागते हुए वक़्त के दरिया से, भागते हुए लम्हों में से कुछ पल क़ैद करने का समय मिल जाता है। कल की बारिश के बाद आज की सुबह कुछ अलग ही थी। हवा में ताज़गी थी, आकाश धुला हुआ-सा था, और हमेशा की तरह मैं अपनी प्रिय जगह — अपने घर की छत पर, मोगरे के पेड़ के पास बैठी थी—वहीं, जहाँ अक्सर कुछ ख्याल चुपचाप जन्म लेते हैं, और कुछ उत्तर बिना किसी प्रश्न के उतर आते हैं। कितना सुंदर पल हैं… बस एक भीगी हुई सुबह, मोगरे की भीनी-सी महक, ध्यान का सुरूर, और अस्तित्व का एक कोमल स्पर्श…

In that moment, something whispered through me…

🌼 Sometimes Life may be solitude

🌼 Sometimes, Life is attitude

🌼 And sometimes, it is quietude

🌼Solitude – the heart’s echo feels distant and depth at once.

🌼Attitude – Quiet on the surface, but unstoppable within, where resilience breathes through every silence, courage grows out of pain.

🌼Quietude – Where there is no need to explain, no urge to be understood, just a silent letting go, and a Peaceful walking away without looking back.

तभी कहीं कोयल की कूक सुनाई दी, और पास ही कुछ कौए भी अपने सुरों में मशगूल थे। कोयल दिखाई नहीं दी, पर एक कौआ हमारे घर के बाहर खड़े नीम के पेड़ पर बैठा नज़र आ गया। न जाने क्यों, मेरी आँखें उसी पर ठहर गईं। जैसे नीम की उस शाख पर कोई कौआ नहीं, जीवन का कोई मौन सूत्र बैठा हो। उसे देखकर अचानक लगा, लोग इस बेचारे को इतना बदनाम क्यों करते हैं? कितना सुंदर पक्षी है…चमकती हुई गोल आँखें, तराशी हुई-सी चोंच, और एक Grace…गरिमा के साथ बैठा हुआ। ऐसा लगा मानो उसे किसी प्रमाण की आवश्यकता ही न हो। उसे कोयल नहीं होना था, वह बस था— अपनी ही आवाज़ में, अपने ही स्वभाव में, पूरी शिद्दत के साथ। वह अपनी कर्कशता को भी सहजता से जी रहा था…और शायद उसी में उसका सौंदर्य था— कायनात ने हर किसी को अनूठा बनाया है… उसने किसी को भी दोहराया नहीं। हर चेहरा नया, हर स्वर नया, हर हृदय की धड़कन का अपना संगीत। आँखों के आइरिस अलग, अंगूठों के निशान अलग, डीएनए अलग। मानो अस्तित्व को प्रतिलिपियाँ बनाना आता ही नहीं। फिर भी कुछ है जो चुपके-चुपके सबको एक डोर में बाँध रहा है, जिस जल को नदियाँ बहाती हैं, वही हमारी आँखों से आँसू बनकर बहता है। धरती अपने शरीर में 70% जल को समेटे हुए है, और मनुष्य भी अपने भीतर सबसे अधिक जल का ही स्वर लिए चलता है। जिस हवा ने मुझे छुआ है, उसी ने पर्वतों को भी छुआ है, उसी ने महासागरों पर उड़ान भरी है, एक श्वास वृक्षों से निकलती है, ऑक्सीजन के रूप में, हमारे भीतर प्रवेश करती है। एक श्वास हमसे निकलती है, वृक्षों के भीतर जीवन बन जाती है। कहाँ समाप्त होता है वृक्ष, और कहाँ आरम्भ होता है मनुष्य? शायद इसी विस्मय को देखकर हमारे प्राचीन ऋषियों ने हिरण्यगर्भ की कल्पना की होगी— 🌼वह स्वर्णिम गर्भ,

🌼वह विराट चेतना,

🌼वह ब्रह्मांडीय हृदय, जिससे सब उत्पन्न होता है, जिसमें सब धड़कता है, और जिसमें सब अंततः विश्राम पाता है।

🌼हर एक शख़्स को कुदरत ने जुदा रखा है, फिर भी सबमें किसी रहस्य का पता छुपा रखा है।

🌼कितना हैरान करे फ़र्क़ का ये आलम, सबको अनूठा भी बनाया है यहाँ, और एक-सा बना के रखा है। अनंत संघ … 🪔🪔🪔

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