चाहिए

चाहिए

–Anant Sri

“चाहिए” ही सारे संघर्ष और संताप की आधारभूमि है।  “है” में जीना ही तुम्हें सारे संघर्ष और संताप से मुक्त करता है। तुम इस “है” में जीना सीखो। “चाहिए” की बात मत करो।

“जो है” उसका पूरा स्वीकार करो। यह स्वीकार ही तुम्हें मुक्त करेगा और जीवन के चिरंतन प्रवाह से तुम्हें जोड़ देगा। जीवन का यह प्रवाह तुम्हें प्रतिक्षण एक नया जन्म देता है।

यही मुक्ति है – जीवन के प्रवाह में, सर्व स्वीकार में प्रवाहित होना…

 

This Post Has 4 Comments

  1. परमवीर

    नमन प्रभु ❤️🙏🏾❤️

  2. अनीता

    🌸🙏🌸

  3. Rajan

    It’s a very Beautiful Sutra to attain deep satisfaction.

  4. Piku

    Ahobhav 🌹💐🙏

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